(कवित्त)
अष्ट सिद्धि दायक हैं संतन सहायक हैं,
सृष्टि ही के नायक हैं आनन्द करन हैं। [1]
दरन हैं कलि के कलेसन के जाल हाल,
करत निहाल लीनी आन ये सरन हैं॥ [2]
दास दृग रंजन हैं खलगन गंजन हैं,
कंज लखि हारे लाल कांतिन हरन हैं। [3]
धीरज धरन हारे ऐसे ना निहारे जैसे,
तारन तरन राधा रानी के चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, श्री राधा शतक (85)
श्री राधा रानी के चरण कमल अष्ट सिद्धियों को प्रदान करने वाले हैं, संत जनों की नित्य सहायक हैं, सृष्टि के मूल स्त्रोत हैं, और समस्त प्रकार से आनंद प्रदान करने वाले हैं। [1]
अष्ट सिद्धि दायक हैं संतन सहायक हैं,
सृष्टि ही के नायक हैं आनन्द करन हैं। [1]
दरन हैं कलि के कलेसन के जाल हाल,
करत निहाल लीनी आन ये सरन हैं॥ [2]
दास दृग रंजन हैं खलगन गंजन हैं,
कंज लखि हारे लाल कांतिन हरन हैं। [3]
धीरज धरन हारे ऐसे ना निहारे जैसे,
तारन तरन राधा रानी के चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, श्री राधा शतक (85)
श्री राधा रानी के चरण कमल अष्ट सिद्धियों को प्रदान करने वाले हैं, संत जनों की नित्य सहायक हैं, सृष्टि के मूल स्त्रोत हैं, और समस्त प्रकार से आनंद प्रदान करने वाले हैं। [1]
श्री राधा रानी के चरण कमल कलियुग के क्लेश और कष्टों को दंड देने वाले हैं, और अनाथों को अपनी शरण में ले कर निहाल कर देते हैं। [2]
श्री राधा रानी के चरण कमल उनके जनों की दृष्टि में रमण करते हैं, दुष्टों को दंड देते हैं, जिसके दर्शन मात्र से श्री लाल जी अपनी अंग कांति हारे हुए हैं। [3]
श्री राधा रानी के चरण कमल के दर्शन से बड़े-बड़े धैर्यवान भी अपना धीरज इस प्रकार हार चुके हैं, जैसे कभी ऐसे चरण कमल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त न हुआ हो। जो सब को संसार से तारते हैं, उन्हें भी तारने वाले हैं श्री राधा रानी के चरण कमल। [4]

