लोक वेद मरजाद सब, लाज काज सन्देह।
देत बहाए प्रेम करि, विधि निषेद को नेह॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (7)
संसार का ज्ञान, बुद्धि, मर्यादा, लोक-लज्जा, क्रिया-कर्म तथा पारस्परिक सन्देह आदि सभी भौतिक कल्मषों को प्रेम बहा देता है, और प्रेम स्नेह के समस्त बंधनों को भी तोड़ देता है।

