ब्रह्म सनातन शुद्ध हरि -  श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (5)

ब्रह्म सनातन शुद्ध हरि - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (5)

ब्रह्म सनातन शुद्ध हरि, हरन सकल जग फंद।
सो वृंदावन चंद में, फँस्यो प्रेम के फंद॥
-  श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (5)

श्री हरि, जो ब्रह्मस्वरूप और सनातन हैं तथा समस्त जगत के मोह-रूपी फंदे में फँसे जीवों का मोह हरने वाले हैं, वही श्री हरि श्री वृन्दावन धाम में स्वयं प्रेम के बंधन में बँधे हुए हैं।