गुणातीतं परं ब्रह्म व्यापकं ब्रज उच्यते।
सदानन्दं परं ज्योति मुक्तानां पदव्ययम्॥
- स्कंद पुराण (2.6.1.20)
जो परम ज्योति सदा आनंदमय है, वही परम ब्रह्म है , जो सत्व,रज तथा तम, तीनों गुणों से परे है, सर्व व्यापक है, इसी को श्री ब्रज धाम कहते हैं, जहाँ मुक्त महापुरुषों का वास है।
सदानन्दं परं ज्योति मुक्तानां पदव्ययम्॥
- स्कंद पुराण (2.6.1.20)
जो परम ज्योति सदा आनंदमय है, वही परम ब्रह्म है , जो सत्व,रज तथा तम, तीनों गुणों से परे है, सर्व व्यापक है, इसी को श्री ब्रज धाम कहते हैं, जहाँ मुक्त महापुरुषों का वास है।

