श्रीगान्धर्वा चरणकमलद्वन्द्वलावण्यलीला माधुर्य्यैकाम्बुधिमतिमदं गाहतां कर्हि चेतः।
वृन्दारण्ये तृणमिव परित्यज्य सर्वामखर्वां निर्वाणादि-श्रियमपि कदा वासनिर्वाहकःस्याम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.2)
श्रीराधा-चरण-कमलों के लावण्यलीला-माधुर्य सागर में मेरा चित्त कब अतिशय मत्त होकर अवगाहन करेगा? समस्त महत् वस्तुओं को यहाँ तक कि मोक्षादि सम्पत्ति को भी तृणवत् परित्याग करके श्रीवृन्दावन में कब वास कर जीवन अतिवाहित कर सकूँगा।
वृन्दारण्ये तृणमिव परित्यज्य सर्वामखर्वां निर्वाणादि-श्रियमपि कदा वासनिर्वाहकःस्याम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.2)
श्रीराधा-चरण-कमलों के लावण्यलीला-माधुर्य सागर में मेरा चित्त कब अतिशय मत्त होकर अवगाहन करेगा? समस्त महत् वस्तुओं को यहाँ तक कि मोक्षादि सम्पत्ति को भी तृणवत् परित्याग करके श्रीवृन्दावन में कब वास कर जीवन अतिवाहित कर सकूँगा।

