श्री राधे ! प्रियतम द्रक् सङ्गम - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (1)

श्री राधे ! प्रियतम द्रक् सङ्गम - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (1)

श्री राधे ! प्रियतम द्रक् सङ्गम संजात हास द्रकसलिलैः।
भवदीयैः स्नानं मे भूयात् सततं न पाथोभिः॥

- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (1)

हे श्री राधे, क्या सदैव मेरी आँखें प्रियतम और आपकी आँखों के संगम के दर्शन से होने वाले अद्भुत प्रेम आनंद से अश्रु पूरित होंगी, न की जल से?