इन कजरारी अंखियन में - ब्रज के दोहे

इन कजरारी अंखियन में - ब्रज के दोहे

इन कजरारी अंखियन में, बस्यो रहत दिन रात।
प्रीतम प्यारे है सखी, ताते साँवल गात॥

- ब्रज के दोहे

हे श्री स्वामिनी जू!  आपकी इन कजरारी काली आँखों में नित्य ही प्रियतम बसे रहते हैं, इसीलिए उनके श्री अंगों का रंग भी काजल के समान श्यामल (साँवला) हो गया है और वे ‘साँवरा’ कहलाने लगे।