दास कहैं करत निहाल ततकाल हाल,
जिनकी सरन लेत रंचिक डर न हैं।
- श्री लाल बलबीर
जिनकी शरण मे जाने से रंच मात्र भी हृदय मे भय नहीं रह जाता, ऐसे श्री राधा रानी के चरण कमलों का दासत्व स्वीकार करते ही तत्क्षण वे हृदय को निहाल कर देते हैं।
जिनकी सरन लेत रंचिक डर न हैं।
- श्री लाल बलबीर
जिनकी शरण मे जाने से रंच मात्र भी हृदय मे भय नहीं रह जाता, ऐसे श्री राधा रानी के चरण कमलों का दासत्व स्वीकार करते ही तत्क्षण वे हृदय को निहाल कर देते हैं।

