भूयान्मेऽभ्यव्हारस्तावक ताम्बूल चर्वित नैव।
पानं करुणा कूत स्मिता वलोका मृतेनैव॥
- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (2)
हे श्री राधे, मेरा यह सौभाग्य कब होगा, की इस भूमंडल में मेरा पोषाहार केवल आपके चर्वित ताम्बूल पर आधारित होगा, तथा आपकी करुणा दृष्टि कटाक्ष एवं मंद मुस्कान ही मेरे उत्कण्ठित ह्रदय को शीतल करेंगे।
पानं करुणा कूत स्मिता वलोका मृतेनैव॥
- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (2)
हे श्री राधे, मेरा यह सौभाग्य कब होगा, की इस भूमंडल में मेरा पोषाहार केवल आपके चर्वित ताम्बूल पर आधारित होगा, तथा आपकी करुणा दृष्टि कटाक्ष एवं मंद मुस्कान ही मेरे उत्कण्ठित ह्रदय को शीतल करेंगे।

