जय श्री हरिदासी राधे जू। [1]
महा प्रेम भरि अति सुखरासी अद्भुत रूप अगाधे जू॥ [2]
परम कृपाल उदार रसिक वर हरत लाल की बाधे जू। [3]
श्री कुंजबिहारिनि ललित किसोरी, पुरई मन की साधे जू॥ [4]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (84)
महा प्रेम भरि अति सुखरासी अद्भुत रूप अगाधे जू॥ [2]
परम कृपाल उदार रसिक वर हरत लाल की बाधे जू। [3]
श्री कुंजबिहारिनि ललित किसोरी, पुरई मन की साधे जू॥ [4]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (84)
समस्त सुखों की राशि, अद्भुत अगाध रूपमयी, महाप्रेम में नित्य विहार करने वाली, हरिदास दुलारी श्री राधा जू की जय हो। [1 & 2]
आप परम कृपालु एवं उदार हैं और रसिक वर श्री लाल जू के ह्रदय की पीड़ा का हरण करने वाली हैं। [3]
श्री ललित किशोरी कह रहे हैं "आपने मेरे मन की कामना को पूर्ण कर दिया हे नित्य कुञ्ज में विहार करने वाली श्री बिहारिणी जू, हरिदास दुलारी श्री राधा जू, आपकी जय हो।" [4]

