चरण कमल पर तन मन वारौं। [1]
कोट कलप लगि छिन न बिसारौं, जो भरि नयन निहारौं॥ [2]
दृढ़ लै हिये बसावौं निसि दिन, मन की उमंग निकारौं। [3]
भोरी छिन इक दरसन आसा, कोटि प्राण तजि डारौं॥ [4]
- भोरी सखी, प्रेम की पीर (54)
श्री भोरी सखी कह रही हैं "श्री राधा रानी के चरण कमल को यदि एक बार जी भर कर निहार लूँ, तो करोड़ो कल्पों तक एक क्षण के लिए भी न भुलाऊँ, उनपर मैं अपना मन प्राण न्योछावर कर दूँ।" [1 & 2]
श्री राधा रानी के चरण कमल के दर्शन के पश्चात उनको निसि दिन अपने हृदय मे दृढ़ता पूर्वक विराजमान कर लूँगी, मन की चंचलता को बाहर निकाल दूँगी। [3]
श्री भोरी सखी कह रही हैं "श्री राधा रानी के चरण कमल के दर्शन की आशा मे मैं करोड़ों प्राणों को न्योछावर कर दूँ।" [4]
कोट कलप लगि छिन न बिसारौं, जो भरि नयन निहारौं॥ [2]
दृढ़ लै हिये बसावौं निसि दिन, मन की उमंग निकारौं। [3]
भोरी छिन इक दरसन आसा, कोटि प्राण तजि डारौं॥ [4]
- भोरी सखी, प्रेम की पीर (54)
श्री भोरी सखी कह रही हैं "श्री राधा रानी के चरण कमल को यदि एक बार जी भर कर निहार लूँ, तो करोड़ो कल्पों तक एक क्षण के लिए भी न भुलाऊँ, उनपर मैं अपना मन प्राण न्योछावर कर दूँ।" [1 & 2]
श्री राधा रानी के चरण कमल के दर्शन के पश्चात उनको निसि दिन अपने हृदय मे दृढ़ता पूर्वक विराजमान कर लूँगी, मन की चंचलता को बाहर निकाल दूँगी। [3]
श्री भोरी सखी कह रही हैं "श्री राधा रानी के चरण कमल के दर्शन की आशा मे मैं करोड़ों प्राणों को न्योछावर कर दूँ।" [4]

