(राग गौरी एवं नट)
हमें बृजराज लाड़िले सों काज। [1]
यश अपयश को हमें कहा डर कहिनों होय कहिलेऊ आज॥ [2]
केधों काहू कृपा करीधों न करीजो सन्मुख व्रजनृप युवराज। [3]
गोविन्द प्रभु की कृपा चाहिए जो हैं सकल घोष सिरताज॥ [4]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (573)
मेरे एकमात्र चिंतन व्रज के भगवान श्रीकृष्ण हैं। [1]
मुझे यश या अपयश का कोई भय नहीं है, और अगर कुछ भी कहने की आवश्यकता है, तो मैं इसे आज कहूंगा! [2]
मुझे कृपा रूप में एकमात्र व्रज के इस राजकुमार को देखने की कामना है। [3]
कवि श्री गोविंद स्वामी कह रहे हैं " मुझे एकमात्र उन श्री कृष्ण की कृपा चाहिए, जो समस्त गोप ग्वाल बालों के सिरताज हैं।" [4]
हमें बृजराज लाड़िले सों काज। [1]
यश अपयश को हमें कहा डर कहिनों होय कहिलेऊ आज॥ [2]
केधों काहू कृपा करीधों न करीजो सन्मुख व्रजनृप युवराज। [3]
गोविन्द प्रभु की कृपा चाहिए जो हैं सकल घोष सिरताज॥ [4]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (573)
मेरे एकमात्र चिंतन व्रज के भगवान श्रीकृष्ण हैं। [1]
मुझे यश या अपयश का कोई भय नहीं है, और अगर कुछ भी कहने की आवश्यकता है, तो मैं इसे आज कहूंगा! [2]
मुझे कृपा रूप में एकमात्र व्रज के इस राजकुमार को देखने की कामना है। [3]
कवि श्री गोविंद स्वामी कह रहे हैं " मुझे एकमात्र उन श्री कृष्ण की कृपा चाहिए, जो समस्त गोप ग्वाल बालों के सिरताज हैं।" [4]

