(राग कान्हरौ व यमन)
आज बने सखि नंदकुमार।
वाम भाग वृषभान नंदिनी ललितादिक गावे सिंहद्वार॥ [1]
कंचन थार लियेजु कमल कर मुक्ता फल फूलन के हार।
रोरी को सिर तिलक विराजत करत आरती हरस अपार॥ [2]
यह जोरी अविचल श्रीवृन्दावन असीस देत सकल व्रजनार।
कुँजमहल में राजत दोऊ परमानन्द दास बलिहार॥ [3]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (795)
श्री परमानन्द दास एक सखी से कह रहे हैं "अरे सखी, देखो तो, आज नन्दकुमार की छवि कितनी सुन्दर बनी है, उनके वाम भाग में वृषभानु नंदिनी विराजित हैं, एवं ललितादिक सखियाँ सिंहद्वार पर उपस्थित मंगल गान कर रही हैं। [1]
सखियों के हाथ में स्वर्ण थाल है जिसमे भोग के लिए फल है, मोती एवं फूलों की माला है। श्री जुगल जोरी कुञ्ज महल में विराजित हैं, उनके मस्तक पर कुमकुम का तिलक है, और सखियाँ अति हर्षित हो दोनों की आरती कर रही हैं एवं अपना आशीर्वाद दे रही हैं के यह जोरि नित्य श्री वृन्दावन में विराजमान रहे।" [2 & 3]
आज बने सखि नंदकुमार।
वाम भाग वृषभान नंदिनी ललितादिक गावे सिंहद्वार॥ [1]
कंचन थार लियेजु कमल कर मुक्ता फल फूलन के हार।
रोरी को सिर तिलक विराजत करत आरती हरस अपार॥ [2]
यह जोरी अविचल श्रीवृन्दावन असीस देत सकल व्रजनार।
कुँजमहल में राजत दोऊ परमानन्द दास बलिहार॥ [3]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (795)
श्री परमानन्द दास एक सखी से कह रहे हैं "अरे सखी, देखो तो, आज नन्दकुमार की छवि कितनी सुन्दर बनी है, उनके वाम भाग में वृषभानु नंदिनी विराजित हैं, एवं ललितादिक सखियाँ सिंहद्वार पर उपस्थित मंगल गान कर रही हैं। [1]
सखियों के हाथ में स्वर्ण थाल है जिसमे भोग के लिए फल है, मोती एवं फूलों की माला है। श्री जुगल जोरी कुञ्ज महल में विराजित हैं, उनके मस्तक पर कुमकुम का तिलक है, और सखियाँ अति हर्षित हो दोनों की आरती कर रही हैं एवं अपना आशीर्वाद दे रही हैं के यह जोरि नित्य श्री वृन्दावन में विराजमान रहे।" [2 & 3]

