त्रिषणमिह भवदंघ्रिप्रणतिः सन्ध्या प्रकृष्टदैन्येन।
जापस्तुताप क्लेशं विगाढ भावेन कीर्तन नाम्नाम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (3)
हे श्री राधे, मेरा त्रिकाल स्नान मात्र आपके चरणों में प्रणाम करने से पूर्ण हो तथा क्लेशों के निवारण के लिए जप स्तुति में मात्र अति प्रेम भाव पूर्वक आपके नाम का उच्चारण हो।
जापस्तुताप क्लेशं विगाढ भावेन कीर्तन नाम्नाम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (3)
हे श्री राधे, मेरा त्रिकाल स्नान मात्र आपके चरणों में प्रणाम करने से पूर्ण हो तथा क्लेशों के निवारण के लिए जप स्तुति में मात्र अति प्रेम भाव पूर्वक आपके नाम का उच्चारण हो।

