दशहूँ दिशा में मोहिं गोविंद राधे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (228)

दशहूँ दिशा में मोहिं गोविंद राधे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (228)

दशहूँ दिशा में मोहिं गोविंद राधे।
जित देखूँ दीखे तू ही ऐसी बना दे।।

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (228)

हे श्री राधा गोविंद, मुझपर ऐसी कृपा कर दीजिये की मैं दसों दिशाओं में जिस ओर भी देखूँ, मुझे केवल आप ही दिखाई दें।