(राग नायकी)
पोढ़े श्याम श्यामा संग। [1]
रंग महल की ललित तिबारी परदा परै सुरंग॥ [2]
जगमगात पावक अंगीठी भरै रतिरस रंग। [3]
नन्ददास दम्पति सुरत सुख जीत्यो मन मथ अंग॥ [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली
श्री श्यामसुंदर श्री श्यामा जू के संग रंग महल में पौढ़े हैं एवं द्वार पर सुरंग पर्दा लगा हुआ है। [1 & 2]
कक्ष में अंगीठी जल रही है जिसका प्रकाश श्री श्यामा श्याम के सुख में प्रेम रस के रंग भर रहा है। [3]
श्री नन्ददास कह रहे हैं "श्री दम्पति जू की अगोचर निकुंज क्रीड़ा ने, सबके मन को मथने वाले कामदेव को भी जीत लिया है।" [4]
पोढ़े श्याम श्यामा संग। [1]
रंग महल की ललित तिबारी परदा परै सुरंग॥ [2]
जगमगात पावक अंगीठी भरै रतिरस रंग। [3]
नन्ददास दम्पति सुरत सुख जीत्यो मन मथ अंग॥ [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली
श्री श्यामसुंदर श्री श्यामा जू के संग रंग महल में पौढ़े हैं एवं द्वार पर सुरंग पर्दा लगा हुआ है। [1 & 2]
कक्ष में अंगीठी जल रही है जिसका प्रकाश श्री श्यामा श्याम के सुख में प्रेम रस के रंग भर रहा है। [3]
श्री नन्ददास कह रहे हैं "श्री दम्पति जू की अगोचर निकुंज क्रीड़ा ने, सबके मन को मथने वाले कामदेव को भी जीत लिया है।" [4]

