पादांगुलीय-पादांगद-नूपुररत्नरोचिषां वीचीः - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.27)

पादांगुलीय-पादांगद-नूपुररत्नरोचिषां वीचीः - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.27)

पादांगुलीय-पादांगद-नूपुररत्नरोचिषां वीचीः।
राधापदाब्ज ईक्षे नखमणिचन्द्रोच्छलच्छटाच्छुरिताः॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.27)

श्रीराधा जी के चरणकमलों की अंगुलियों के पादांगद तथा नूपुरों की रत्नमय किरणों से नख-मणिचन्द्र से उच्छलित कांति की उद्भासिता तरगों को देखने की मैं इच्छा करता हूँ।