(राग कान्हरौ)
माई री सहज जोरी प्रगट भई
जु रंग की गौर स्याम घन दामिनि जैसैं। [1]
प्रथमहूँ हुती अबहूँ आगें हूँ रहिहै न टरिहै तै सैं॥ [2]
अंग अंग की उजराई सुघराई चतुराई सुंदरता ऐसैं।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी सम बैसे॥ [3]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (1)
बाँके बिहारी लाल के प्राकट्य के समय हरिदास जी कहते हैं- हे सखी सहज जोड़ी नित्य श्याम-श्यामा की प्रकट हुई है। गौर श्याम वर्ण की यह जोरी घन दामिनी के समान है। [1]
यह जोड़ी पहले भी थी, अब भी है और आगे भी रहेगी। [2]
इनके अंगों की अनिर्वचनीय शोभा, उज्ज्वलता एवं उपमा एक जैसी है (अर्थात् एक समान है )। श्री हरिदास जी के प्रिया प्रियतम सम वयस अर्थात् समान आयु के हैं। [3]
माई री सहज जोरी प्रगट भई
जु रंग की गौर स्याम घन दामिनि जैसैं। [1]
प्रथमहूँ हुती अबहूँ आगें हूँ रहिहै न टरिहै तै सैं॥ [2]
अंग अंग की उजराई सुघराई चतुराई सुंदरता ऐसैं।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी सम बैसे॥ [3]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (1)
बाँके बिहारी लाल के प्राकट्य के समय हरिदास जी कहते हैं- हे सखी सहज जोड़ी नित्य श्याम-श्यामा की प्रकट हुई है। गौर श्याम वर्ण की यह जोरी घन दामिनी के समान है। [1]
यह जोड़ी पहले भी थी, अब भी है और आगे भी रहेगी। [2]
इनके अंगों की अनिर्वचनीय शोभा, उज्ज्वलता एवं उपमा एक जैसी है (अर्थात् एक समान है )। श्री हरिदास जी के प्रिया प्रियतम सम वयस अर्थात् समान आयु के हैं। [3]

