राधा राधा नाम को, रसनैं महा सवाद।
या प्रबंध को नाम हूँ, पायौ प्रियाप्रसाद॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (88)
श्री राधा नाम के रटन से जिह्वा को महास्वाद की अनुभूति होती है; इसलिए इस ग्रन्थ के इस प्रबंध को भी “प्रियाप्रसाद” नाम प्राप्त हुआ है, जिसमें एकमात्र श्री राधा के गुणों का ही संवाद है।
या प्रबंध को नाम हूँ, पायौ प्रियाप्रसाद॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (88)
श्री राधा नाम के रटन से जिह्वा को महास्वाद की अनुभूति होती है; इसलिए इस ग्रन्थ के इस प्रबंध को भी “प्रियाप्रसाद” नाम प्राप्त हुआ है, जिसमें एकमात्र श्री राधा के गुणों का ही संवाद है।

