गोपनागरेन्द्र कत्थितोरि काल कारिणीम्। गानतान मुग्ध कृष्ण वंशिका प्रहारणीम्॥
अंघ्रि मनोज कोटि रूप गर्व नाशिनीम्। राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥
- श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (7)
जो भी व्रज के राजकुमार श्री कृष्ण को अपशब्द कहता है उसके लिए आप काल का रूप धारण कर लेती हैं। आप श्री कृष्ण की बांसुरी चुरा लेती हैं, जिसके गीत और तान उन्हें मुग्ध करती हैं। आपके चरण कमलों की सुंदरता करोड़ों कामदेवों के रूप के गर्व को भंग कर देता है। हे निकुञ्ज धाम वासिनी श्री राधिका जू, मैं आपको नमन करता हूँ।
अंघ्रि मनोज कोटि रूप गर्व नाशिनीम्। राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥
- श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (7)
जो भी व्रज के राजकुमार श्री कृष्ण को अपशब्द कहता है उसके लिए आप काल का रूप धारण कर लेती हैं। आप श्री कृष्ण की बांसुरी चुरा लेती हैं, जिसके गीत और तान उन्हें मुग्ध करती हैं। आपके चरण कमलों की सुंदरता करोड़ों कामदेवों के रूप के गर्व को भंग कर देता है। हे निकुञ्ज धाम वासिनी श्री राधिका जू, मैं आपको नमन करता हूँ।

