राधा-चरण-रणन्मणिनूपुरमूकीकृतां हरेर्मुरलीम्।
विफलित-तत्तत्फुत्कृतिमखिलसखीसार्थहासिनीं स्मरत॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.30)
श्रीराधा के चरणकमलों के नूपुरों के शब्द से मुरली के मूक (शब्द रहित) हो जाने से जब श्रीहरि बार-बार फूँकने पर भी व्यर्थ-मनोरथ हो गये, तब समस्त सखी-मण्डली हँसने लगी-यह लीला तू स्मरण कर।
विफलित-तत्तत्फुत्कृतिमखिलसखीसार्थहासिनीं स्मरत॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.30)
श्रीराधा के चरणकमलों के नूपुरों के शब्द से मुरली के मूक (शब्द रहित) हो जाने से जब श्रीहरि बार-बार फूँकने पर भी व्यर्थ-मनोरथ हो गये, तब समस्त सखी-मण्डली हँसने लगी-यह लीला तू स्मरण कर।

