कृपा तो लालन जू की चहिये - श्री सूरदास जी

कृपा तो लालन जू की चहिये - श्री सूरदास जी

कृपा तो लालन जू की चहिये । [1]
इने करी करेसो आछी अपने सिर पै सहिये ।। [2]
अपनो दोष विचार सखी री उनसों कछु न कहिये । [3]
सूर श्याम सो कछु न कहिए ज्यों राखें त्यों रहिये ।। [4]

- श्री सूरदास जी

श्री सूरदास किसी सखी से कहते हैं "हे सखी, मुझे तो एकमात्र श्री लाल जू (श्री कृष्ण) की कृपा ही चाहिए। [1]
इनका किया हुआ भले ही मुझे दुखदायी प्रतीत हो, परन्तु उसे मैं अच्छा मान कर सहूँगी। [2]
उसमें मैं अपना ही दोष देख कर हे सखी, श्री लाल जू से कभी कुछ नहीं कहूँगी। [3]
मैं श्री श्यामसुन्दर से कोई शिकायत नहीं करुँगी, वो जिस परिस्थिति में रखेंगे, मैं उस परिस्थिति में प्रसन्नता पूर्वक रहूँगी।" [4]