मन रह वृन्दावन गोविंद राधे।
तन चौरासी लाख चाहे दिला दे।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5929)
हे श्री राधा गोविंद, मेरा शरीर भले ही चौरासी लाख योनियों में भटकता रहे, परंतु मेरे मन को श्री वृन्दावन धाम का वास दिला दीजिये।
तन चौरासी लाख चाहे दिला दे।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5929)
हे श्री राधा गोविंद, मेरा शरीर भले ही चौरासी लाख योनियों में भटकता रहे, परंतु मेरे मन को श्री वृन्दावन धाम का वास दिला दीजिये।

