आजु बधाई श्रीवृन्दावन - श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (63)

आजु बधाई श्रीवृन्दावन - श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (63)

(राग बसंत)
आजु बधाई श्रीवृन्दावन।
कुंजमहल श्रीबिहारी बिहारिनि केलि करत छिनही छिन॥ [1]
श्रीहरिदासी जू लाड़ लड़ावति इनही कौ ये हैं धन।
श्रीललितमोहिनी की निजु जीवन ये वे वे एकै मन॥ [2]

- श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (63)

श्री ललित मोहिनी देव जू कह रहे हैं "आज श्री वृन्दावन में बधाई है, क्यूँकि आज श्री बिहारी बिहारिणी जू कुञ्ज महल में क्षण प्रतिक्षण केलि लीला परायण हैं। [1]
इस नित्य विहार रस को प्रकट करने वाली श्री हरिदासी सखी नित्य श्री बिहारी बिहारिणी जू को लाड़ लड़ा रही हैं। श्री ललित मोहिनी देव जू कह रहे हैं "मेरे जीवन का सर्वस्व धन श्री हरिदास एवं श्री बिहारी बिहारिणी जू हैं जिनके मन एक ही हैं (अर्थात् जो जो श्री राधा कृष्ण को रुचिकर है वह ही स्वामी श्री हरिदास जी को भी)।" [2]