गढि गढि कें बातें कहे - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (130)

गढि गढि कें बातें कहे - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (130)

गढि गढि कें बातें कहे, मन में तनक न प्रीत।
नारायण कैसे मिले, साहब सांचे मीत॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (130)

श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि जो जीव बना-बनाकर बड़ी-बड़ी भक्ति अथवा प्रेम की बातें तो बहुत करते हैं, परंतु उनके मन में लेशमात्र भी वास्तविक प्रेम नहीं है। वे साँचे साहिब (श्री कृष्ण), जो केवल हृदय की सच्ची पुकार और निष्कपट प्रेम से ही रीझते हैं, भला ऐसी बनावटी बातों से कैसे मिल सकते हैं?