कहिबो सुनिबो समझिबो, राधा ही को होय।
राधा के हित की कथा, भूलि सुमरिहै सोय॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (66)
जीवन में जो कुछ भी कहना, सुनना और समझना हो, वह केवल श्री राधा के विषय में ही होना चाहिए। जो भाग्यशाली जीव इस संसार को पूरी तरह भूलकर केवल श्री राधा के प्रेम की कथा का निरंतर स्मरण और चिंतन करता है, वही वास्तव में धन्य है।
राधा के हित की कथा, भूलि सुमरिहै सोय॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (66)
जीवन में जो कुछ भी कहना, सुनना और समझना हो, वह केवल श्री राधा के विषय में ही होना चाहिए। जो भाग्यशाली जीव इस संसार को पूरी तरह भूलकर केवल श्री राधा के प्रेम की कथा का निरंतर स्मरण और चिंतन करता है, वही वास्तव में धन्य है।

