अहो बिधना तोपे अचरा पसार मांगो
जनम जनम दीजे याही ब्रज बसिवो ।
- श्री छीत स्वामी
हे विधाता, मैं तुझसे अचरा पसार (झोली फैला कर) माँगता हूँ कि जनम जन्मान्तर मुझे इस ब्रज में वास दीजिए एवं ब्रज से बाहर मत कीजिए ।
जनम जनम दीजे याही ब्रज बसिवो ।
- श्री छीत स्वामी
हे विधाता, मैं तुझसे अचरा पसार (झोली फैला कर) माँगता हूँ कि जनम जन्मान्तर मुझे इस ब्रज में वास दीजिए एवं ब्रज से बाहर मत कीजिए ।

