श्रीमंञ्जीर-ध्वनि मधुरया श्रीपदाम्भोजलक्ष्म्या - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.03)

श्रीमंञ्जीर-ध्वनि मधुरया श्रीपदाम्भोजलक्ष्म्या - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.03)

श्रीमंञ्जीर-ध्वनि मधुरया श्रीपदाम्भोजलक्ष्म्या माधुर्य्यैघैरूपरि च तले रम्यया गौरशेणैः।
स्फूर्जत्पादांगमणिरुचा दिव्यपदांगुलीयैर्भाजन्त्या हृन्निजवनचरद्रधया वे हृतं में॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.03)

सुन्दर मधुर ध्वनि युक्त मंजीर-शोभित श्रीपाद-पद्म की शोभा से, ऊपरी-भाग में गौरकांति तथा तल-देश के रक्तवर्ण माधुर्यप्रवाह से स्फूर्तिशील पादांगद की मणिकांति से तथा दिव्य मादांगुली-समूह से रमणीय श्रीराधा ने निज वन में विचरणस करते-करते मेरे मन को चुरा लिया है।