दोऊ मिल करत भामती बतियाँ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (75)

दोऊ मिल करत भामती बतियाँ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (75)

(राग विहागरौ, ताल चम्पक)
दोऊ मिल करत भामती बतियाँ। [1]
मदन गोपाल कुँवर राधे संग नखमनि अंक लिखत उर छतियाँ॥ [2]
तेसी छिरक रही उजियारी पून्यो चंद शरद की रतियाँ। [3]
केल रूप यह यमुना श्री भट वृन्दावन फूल्यो बहु भतियाँ॥ [4]

- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (75)

आज दोनों (श्री प्यारी जू एवं श्री प्यारे जू) मिल कर बातें कर रहे हैं। [1]
व्रजराज कुंवर श्री मदन गोपाल एवं वृषभानु कुंवरी श्री राधा एक संग एक दूसरे के वक्ष स्थलों पर नखमणि से लिख रहे हैं, और उनके नखमणियों के चिन्ह उनके वक्ष स्थलों पर अंकित हो गए हैं। [2]
दोनों की अंग कांति शरद पुर्णिमा के चंद्र की कांति से भी उज्ज्वल भास रही है। [3]
श्री भट्ट देवाचार्य कहते हैं, "श्री वृन्दावन मे यमुना के किनारे दोनों (प्रिया प्रियतम) नित्य केली लीला पारायण विहार कर रहे हैं।" [4]