इतनी बात कृपा करि दीजै॥
मिलन चटपटी हिय में लागै, विरह ताप तन छीजै। [1]
तुम तौ मिली मिलौ न कृपा करि, मो चित प्रेम सौं भीजै॥
नयनन नीर बहै निशि वासर, हियो कठोर पसीजै। [2]
भोरी को अबलम्ब न दूजौ, टेरि- टेरि कै जीजै॥ [3]
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (317)
हे किशोरी ज़ू आप बस इतनी कृपा कर दीजिए की मेरे हृदय में आपसे मिलने की शीघ्रता जागजाय। आपकी विरह रूपी अग्नि में मेरा शरीर गल जाये। [1]
किशोरी ज़ू आप कृपा करके मिलो ना मिलो पर मेरा चित हमेशा आपके प्रेम में भीगा रहे।मेरे नयनों से हमेशा रात दिन आपकी याद में आँसू बहते रहे जिससे मेरा कठोर हृदय पसीज जाये । [2]
भोरी सखी कहती है कि उनका जीवन आपको पुकार पुकार कर व्यतीत हो जाये क्यूँकि उन्हें सिर्फ़ आपका ही अवलंभ है। [3]
मिलन चटपटी हिय में लागै, विरह ताप तन छीजै। [1]
तुम तौ मिली मिलौ न कृपा करि, मो चित प्रेम सौं भीजै॥
नयनन नीर बहै निशि वासर, हियो कठोर पसीजै। [2]
भोरी को अबलम्ब न दूजौ, टेरि- टेरि कै जीजै॥ [3]
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (317)
हे किशोरी ज़ू आप बस इतनी कृपा कर दीजिए की मेरे हृदय में आपसे मिलने की शीघ्रता जागजाय। आपकी विरह रूपी अग्नि में मेरा शरीर गल जाये। [1]
किशोरी ज़ू आप कृपा करके मिलो ना मिलो पर मेरा चित हमेशा आपके प्रेम में भीगा रहे।मेरे नयनों से हमेशा रात दिन आपकी याद में आँसू बहते रहे जिससे मेरा कठोर हृदय पसीज जाये । [2]
भोरी सखी कहती है कि उनका जीवन आपको पुकार पुकार कर व्यतीत हो जाये क्यूँकि उन्हें सिर्फ़ आपका ही अवलंभ है। [3]

