सुख सम्पति धन धामकी, ताहि न मन में आस।
नारायण जाके हिये, निशिदिन प्रेम प्रकाश॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (175)
जिनके मन में धन, सुख, सम्पत्ति अथवा धाम की तनिक भी इच्छा नहीं होती, उन्हीं के हृदय में प्रतिदिन, प्रत्येक क्षण प्रेम का प्रकाश होता है।
नारायण जाके हिये, निशिदिन प्रेम प्रकाश॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (175)
जिनके मन में धन, सुख, सम्पत्ति अथवा धाम की तनिक भी इच्छा नहीं होती, उन्हीं के हृदय में प्रतिदिन, प्रत्येक क्षण प्रेम का प्रकाश होता है।

