गौर तेजो बिना यस्तु श्यामं तेजः समर्चयेत् ।
जपेद् व ध्यायते वापि स भवेत् पातकी शिवे।।
- गोपालसहस्रनामस्तोत्रम् [१७]
भगवान शंकर के वचन: हे शिवे (पार्वती)! बिना राधा रानी के जो श्याम की अर्चना [जप एवं ध्यान] करता है वो तो पातकी है अर्थात् गौरतेज [राधा] के बिना श्यामतेज [कृष्ण] की उपासना करने से मनुष्य पाप का भागी होता है।
जपेद् व ध्यायते वापि स भवेत् पातकी शिवे।।
- गोपालसहस्रनामस्तोत्रम् [१७]
भगवान शंकर के वचन: हे शिवे (पार्वती)! बिना राधा रानी के जो श्याम की अर्चना [जप एवं ध्यान] करता है वो तो पातकी है अर्थात् गौरतेज [राधा] के बिना श्यामतेज [कृष्ण] की उपासना करने से मनुष्य पाप का भागी होता है।

![गौर तेजो बिना यस्तु श्यामं - गोपालसहस्रनामस्तोत्रम् [१७]](https://images.brajrasik.org/5ecccaa318533e00628515d0-m.jpeg)