यत्पादपद्मनखचन्द्रमणिच्छटाया - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (10)

यत्पादपद्मनखचन्द्रमणिच्छटाया - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (10)

यत्पादपद्मनखचन्द्रमणिच्छटाया विस्फूर्जितं किमपि गोपवधूष्वदर्शि।
पूर्णानुरागरससागरसारमूर्त्तिः सा राधिका मयि कदापि कृपां करोतु॥

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (10)

जिनके पाद-पद्म-नख रूप चन्द्रमणि की किसी अनिर्वचनीय छटा का प्रकाश गोप-वधुओं में देखा जाता है, वही परिपूर्ण अनुराग-रस-समुद्र की सार-मूर्त्ति श्रीराधिका कभी मुझ पर भी कृपा करेंगी ?