नित्य केली आनंद रस - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री जुगल रस माधुरी (12)

नित्य केली आनंद रस - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री जुगल रस माधुरी (12)

नित्य केली आनंद रस, बिच वृंदावन बाग।
“नागरिया” हिय में बसो, श्यामा श्याम सुहाग॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, श्री जुगल रस माधुरी (12)

मेरे हृदय में श्यामा-श्याम की वह युगल-जोड़ी नित्य निवास करती है, जो वृन्दावन के कुंजों के मध्य आनन्दरूप रस बरसा रही है और जो सदा नित्य-केलि में परायण है।