प्रात में निकुंज द्वार ह्वै ललिता - श्री चतुर्भुज दास जी

प्रात में निकुंज द्वार ह्वै ललिता - श्री चतुर्भुज दास जी

(राग विभास)
प्रात में निकुंज द्वार ह्वै ललिता ललित बजाई बीना ।
पोढ़े सुनत श्याम श्री श्यामा दंपति चतुर नवीन नवीना।। 1।।
अति अनुराग सुहाग भरै दोऊ कोक कला जो प्रवीन प्रवीना।
चतुर्भुज दास निरख दंपति सुख तन मन धन नयौछावर कीना।। 2।।

- श्री चतुर्भुज दास जी

प्रातः समय में ललिता एवं अन्य सखियाँ निकुंज द्वार में वीना बजा रही हैं । चतुर एवं नवीन दम्पति राधा कृष्ण अपनी शैया पर विराजमान हैं एवं वीना का आनंद ले रहे हैं। [1]
अति अनुराग में नित्य ही भरी यह जोड़ी कोक कला में निपुण है। श्री चतुरदास जी कहते हैं कि इस दिव्य दंपति जोड़ी को निहार कर वह अपना तन, मन एवं धन [सर्वस्व] नयौछावर कर देते हैं। [2]