जो घायल हरि दृगन के, परे प्रेम के खेत।
नारायण सुनि श्याम गुण, एक संग रो देत॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (173)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि जो भक्त श्री हरि के नेत्रों की चितवन से घायल हो चुके हैं, वही प्रेम के सागर में डूबते हैं। उनकी दशा अत्यंत अद्भुत होती है। वे जैसे ही श्यामसुंदर के गुणों का श्रवण करते हैं, तैसे ही प्रेम के आवेग में सुध-बुध खोकर अश्रु बहाने लगते हैं।
नारायण सुनि श्याम गुण, एक संग रो देत॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (173)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि जो भक्त श्री हरि के नेत्रों की चितवन से घायल हो चुके हैं, वही प्रेम के सागर में डूबते हैं। उनकी दशा अत्यंत अद्भुत होती है। वे जैसे ही श्यामसुंदर के गुणों का श्रवण करते हैं, तैसे ही प्रेम के आवेग में सुध-बुध खोकर अश्रु बहाने लगते हैं।

