जयत्यशेषाद्भुतमाधुरी सा - वृषभानुपुर शतक (1)

जयत्यशेषाद्भुतमाधुरी सा - वृषभानुपुर शतक (1)

जयत्यशेषाद्भुतमाधुरी सा, पुरी वृषाट्टस्करराजकस्य ।
यन्नाम श्रृण्वन्ननुनंदसूनु वृजत्यवस्थां जड़िमाभिधानाम् ॥

- वृषभानुपुर शतक (1), श्री वंशी अली द्वारा रचित

सम्पूर्ण माधुरी वाली, वृषभानुपुर [बरसाना] विजय को प्राप्त हो रही है, जिसके नाम को सुनकर ही श्री कृष्ण मूर्छा को प्राप्त हो रहे हैं।