प्रीति विह्वल प्रिय प्रकृष्ट - श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (8)

प्रीति विह्वल प्रिय प्रकृष्ट - श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (8)

प्रीति विह्वल प्रिय प्रकृष्ट वक्ष शयिनीम्।
नम्र वक्त्र सूक्तिभिर्मुकुन्द भावदायिनीम्॥
प्रेममत्तता भरेण कोटि काम हासिनीम्।
राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥

- श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (8)

आपके प्रेम में विह्वल श्री कृष्ण के विशाल वक्ष स्थल पर आप शयन करती हैं। आप श्री कृष्ण को अति विनम्रता पूर्वक अपनी सुमधुर वाणी से भाव प्रदान करतीं हैं। करोड़ों कामदेवों को लज्जित करने वाली आपकी मुस्कान से आप श्री कृष्ण के हृदय मे प्रेम का संचार करतीं हैं। हे निकुञ्ज धाम वासिनी श्री राधिका जू, मैं आपको नमन करता हूँ।