पड़ी रहो या गैल में, साधु संत चली जाए।
ब्रजरज उड़ मस्तक लगे, तो मुक्ति मुक्त ह्वै जाए॥
- ब्रज के दोहे
मुक्ति भगवान श्री कृष्ण से पूछती है कि मैं सबको मोक्ष प्रदान करती हूँ, मेरी मुक्ति कैसे होगी? तब श्री कृष्ण मुक्ति से कहते हैं—ब्रज की गलियों में ही पड़ी रहो, जहाँ भक्तजन विचरण करते हैं। इस ब्रज-रज का ऐसा प्रभाव है कि जब यह उड़कर तुम्हारे मस्तक पर पड़ेगी, तभी हे मुक्ति! तुम भी मुक्त हो जाओगी। (यह ब्रज-रज की महिमा है कि वह मुक्ति को भी मुक्त कर देती है।)
ब्रजरज उड़ मस्तक लगे, तो मुक्ति मुक्त ह्वै जाए॥
- ब्रज के दोहे
मुक्ति भगवान श्री कृष्ण से पूछती है कि मैं सबको मोक्ष प्रदान करती हूँ, मेरी मुक्ति कैसे होगी? तब श्री कृष्ण मुक्ति से कहते हैं—ब्रज की गलियों में ही पड़ी रहो, जहाँ भक्तजन विचरण करते हैं। इस ब्रज-रज का ऐसा प्रभाव है कि जब यह उड़कर तुम्हारे मस्तक पर पड़ेगी, तभी हे मुक्ति! तुम भी मुक्त हो जाओगी। (यह ब्रज-रज की महिमा है कि वह मुक्ति को भी मुक्त कर देती है।)

