नारायण जाके हृदय - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (168)

नारायण जाके हृदय - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (168)

नारायण जाके हृदय, सुंदर स्याम समाय।
फूल पात फल डारमें, ताको वही लखाय॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (168)

जिसके हृदय में श्यामसुन्दर समा जाते हैं, उसे फूलों, पत्तियों, फलों और वृक्षों की डारों में—अर्थात् हर जगह—श्यामसुन्दर ही दिखाई देते हैं।