राधिका श्याम सुन्दर को प्यारी - श्री छीतस्वामी

राधिका श्याम सुन्दर को प्यारी - श्री छीतस्वामी

(राग रामकली)
राधिका श्याम सुन्दर को प्यारी।
नख शिख अंग अनूप विराजत कोटि चंद दुति बारी॥ [1]
इक छिनु संग न छाँडत मोहन निरखि निरखि बलिहारी।
छीत स्वामी गिरधर बस जाके सो वृषभानु दुलारी ।। [2]

- श्री छीतस्वामी

श्री राधिका श्याम सुंदर की अत्यंत प्यारी हैं । श्री राधिका जू के नख सिख [नख से सिख अर्थात् प्रत्येक अंग] की माधुरी पे कोटि कोटि चंद्रमा को नयौछावर किया जा सकता है । [1]
श्री कृष्ण तो मानो एक क्षण के लिए भी इनका वियोग सहन नहीं कर सकते और एक क्षण के लिए भी श्री राधा को अपने से दूर नहीं करते और बार बार इनको निहार कर बलिहारी जाते हैं । श्री छीतस्वामी कहते हैं कि श्याम सुंदर भी जिसके वश में हैं वही श्री वृषभानु दुलारी श्री राधिका जू हैं । [2]