(राग टोडी)
रसिक शिरमौर ढौरि लगावत गावत राधा राधा नाम । (1)
कुंजभवन बैठे मनमोहन अलिगोहन सोहन बोलतं मुख तेरोई गुणग्राम ॥ (2)
श्रवण सुनत प्यारी पुलकित भई प्रफुलित तन मन रोम रोम सुखराशि वाम । (3)
सूरदास प्रभु गिरिवर धरको चली मिलन गजराज गामिनी झनक रुनुक वनधाम ॥ (4)
- सूरदास
एक सखी श्री राधा से कहती है कि, हे प्यारी : रसिक सिरमौर श्री कृष्ण वृन्दावन की कुंजों में सोहनी लगाते हुए, वृन्दावन की रज की पूर्ण निष्ठा में श्री "राधा राधा" नाम का जाप कर रहे हैं एवं आपके गुणों का गान करते हैं। [1 & 2 ]
ऐसा सुनते ही सुख की राशि साक्षात नित्य विहारिणी श्री राधारानी को इतना सुख मिला कि उनका रोम रोम [तन एवं मन] प्रफुल्लित हो उठा। [3]
सूरदास जी कहते हैं कि तुरंत इसके पश्चात श्री गिरधारी को मिलने गजराज गामिनी [अर्थात श्री राधा जिनकी हाथी के समान मस्त चाल है] पायल की झंकार करते हुए गज की चाल में श्री वृन्दावन धाम की कुंजों की ओर चल दी। [4]
रसिक शिरमौर ढौरि लगावत गावत राधा राधा नाम । (1)
कुंजभवन बैठे मनमोहन अलिगोहन सोहन बोलतं मुख तेरोई गुणग्राम ॥ (2)
श्रवण सुनत प्यारी पुलकित भई प्रफुलित तन मन रोम रोम सुखराशि वाम । (3)
सूरदास प्रभु गिरिवर धरको चली मिलन गजराज गामिनी झनक रुनुक वनधाम ॥ (4)
- सूरदास
एक सखी श्री राधा से कहती है कि, हे प्यारी : रसिक सिरमौर श्री कृष्ण वृन्दावन की कुंजों में सोहनी लगाते हुए, वृन्दावन की रज की पूर्ण निष्ठा में श्री "राधा राधा" नाम का जाप कर रहे हैं एवं आपके गुणों का गान करते हैं। [1 & 2 ]
ऐसा सुनते ही सुख की राशि साक्षात नित्य विहारिणी श्री राधारानी को इतना सुख मिला कि उनका रोम रोम [तन एवं मन] प्रफुल्लित हो उठा। [3]
सूरदास जी कहते हैं कि तुरंत इसके पश्चात श्री गिरधारी को मिलने गजराज गामिनी [अर्थात श्री राधा जिनकी हाथी के समान मस्त चाल है] पायल की झंकार करते हुए गज की चाल में श्री वृन्दावन धाम की कुंजों की ओर चल दी। [4]

