प्रीतम रहै प्रिया मन लिये, प्रिया लिये मन पीको।
सखी रहैं दोऊन मन लिये, रङ्ग बैठे अति नीको॥ [1]
कानन छवि नित नई दिखावें, प्रेम बढे नित हीको।
वृन्दावन हित रूप विहारिनि, सकल तियन सिर टीको॥ [2]
- श्री वृंदावन दास चाचा जी
श्री कृष्ण नित्य श्री राधा को मन में रखते हैं एवं श्री राधिका जू का मन नित्य ही कृष्ण में है । सखियों के मन में दोनो युगल सरकार विराजते हैं, एवं युगल रस के रूप में अद्भुत रंग रस बरसाते हैं । [1]
युगल सरकार नित्य ही वृंदावन की कुंजों में छवि दिखाते हैं एवं प्रेम नित्य नित्य बढ़ता जाता है । श्री हित वृंदावन दास जी कहते हैं कि नित्य विहरिनी हमारी स्वामिनी श्री राधिका जू समस्त गुणों की खान एवं सब की सिरमौर हैं । [2]
सखी रहैं दोऊन मन लिये, रङ्ग बैठे अति नीको॥ [1]
कानन छवि नित नई दिखावें, प्रेम बढे नित हीको।
वृन्दावन हित रूप विहारिनि, सकल तियन सिर टीको॥ [2]
- श्री वृंदावन दास चाचा जी
श्री कृष्ण नित्य श्री राधा को मन में रखते हैं एवं श्री राधिका जू का मन नित्य ही कृष्ण में है । सखियों के मन में दोनो युगल सरकार विराजते हैं, एवं युगल रस के रूप में अद्भुत रंग रस बरसाते हैं । [1]
युगल सरकार नित्य ही वृंदावन की कुंजों में छवि दिखाते हैं एवं प्रेम नित्य नित्य बढ़ता जाता है । श्री हित वृंदावन दास जी कहते हैं कि नित्य विहरिनी हमारी स्वामिनी श्री राधिका जू समस्त गुणों की खान एवं सब की सिरमौर हैं । [2]

