एतद्दष्टकं सुचारुं सर्व सद्गुणाधिके। वर्णितं त्वदीय मोहनेन सुष्ठु राधिके॥
प्रेमतस्य वर्द्धय स्वपाद सेवने सदा, राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥
- श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (9)
हे श्री राधे! इन 8 श्लोकों में आपके सदगुणों का गान स्वयं आपके प्रियतम श्री कृष्ण ने मधुर वाणी से किया है। वह सदैव आपके प्रेम में वर्द्धन करने के लिए आपके चरण कमलों की सेवा करते हैं। हे निकुञ्ज धाम वासिनी श्री राधिका जू, मैं आपको नमन करता हूँ।
प्रेमतस्य वर्द्धय स्वपाद सेवने सदा, राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥
- श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (9)
हे श्री राधे! इन 8 श्लोकों में आपके सदगुणों का गान स्वयं आपके प्रियतम श्री कृष्ण ने मधुर वाणी से किया है। वह सदैव आपके प्रेम में वर्द्धन करने के लिए आपके चरण कमलों की सेवा करते हैं। हे निकुञ्ज धाम वासिनी श्री राधिका जू, मैं आपको नमन करता हूँ।

