क्षणं चरणविच्छेदाच्छ्रीश्वर्याः प्राणहरिणीम्।
पदारविन्दसंलग्नतयैवाहर्निशं स्थिताम्।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (8.22)
क्षण काल के लिए चरण-सेवा त्याग करने पर वह सुन्दरी [राधा दासी] श्रीईश्वरी की प्राण हारिणी हो जाती है, अतः दिनरात वह राधा पद कमल के सन्निकट ही रहती है।

