(राग विभास)
आजु प्रभात लता मंदिर में,
सुख वरषत अति हरषि जुगल वर। [1]
गौर स्याम अभिराम रंग भरे,
लटकि लटकि पग धरत अवनि पर॥ [2]
कुच कुमकुम रंजित मालावलि,
सुरत नाथ श्रीस्याम धाम धर । [3]
प्रिया प्रेम के अंक अलंकृत,
चित्रित चतुर सिरोमनि निजु कर॥ [4]
दंपति अति अनुराग मुदित कल,
गान करत मन हरत परस्पर । [5]
(जै श्री) हित हरिवंश प्रसंसि परायन,
गायन अलि सुर देत मधुर तर॥ [6]
- श्री हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (5)
मंगल प्रभात की वेला में हर्षोन्मादित युगल किशोर अलसाये हुए लटक लटक कर लता भवन की मंजुल भूमि पर मादक गति से चलते हैं। [1 & 2]
वृन्दावन निकुञ धाम में सूरत-विलासी श्रीश्यामसुन्दर की मालाएँ श्रीराधा के हृदय देश के केशर लेप से मण्डित हैं। [3]
इसी प्रकार श्रीप्रियाजी के श्रीअंगों में प्रेम चिह्न (नख क्षत) अलंकृत हैं, जिन्हें चतुर शिरोमणि लाल ने अपने हाथों से चित्रित किया है। [4]
श्रीहित हरिवंश कहते हैं कि अत्यधिक प्रेम उल्लसित दम्पति मधुर मधुर गान करते हुए एक दूसरे का मन हरण कर रहे हैं, और उस गान के साथ प्रशंसा परायण सखियाँ अपना मधुर तर स्वर मिला रही हैं। [5 & 6]
आजु प्रभात लता मंदिर में,
सुख वरषत अति हरषि जुगल वर। [1]
गौर स्याम अभिराम रंग भरे,
लटकि लटकि पग धरत अवनि पर॥ [2]
कुच कुमकुम रंजित मालावलि,
सुरत नाथ श्रीस्याम धाम धर । [3]
प्रिया प्रेम के अंक अलंकृत,
चित्रित चतुर सिरोमनि निजु कर॥ [4]
दंपति अति अनुराग मुदित कल,
गान करत मन हरत परस्पर । [5]
(जै श्री) हित हरिवंश प्रसंसि परायन,
गायन अलि सुर देत मधुर तर॥ [6]
- श्री हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (5)
मंगल प्रभात की वेला में हर्षोन्मादित युगल किशोर अलसाये हुए लटक लटक कर लता भवन की मंजुल भूमि पर मादक गति से चलते हैं। [1 & 2]
वृन्दावन निकुञ धाम में सूरत-विलासी श्रीश्यामसुन्दर की मालाएँ श्रीराधा के हृदय देश के केशर लेप से मण्डित हैं। [3]
इसी प्रकार श्रीप्रियाजी के श्रीअंगों में प्रेम चिह्न (नख क्षत) अलंकृत हैं, जिन्हें चतुर शिरोमणि लाल ने अपने हाथों से चित्रित किया है। [4]
श्रीहित हरिवंश कहते हैं कि अत्यधिक प्रेम उल्लसित दम्पति मधुर मधुर गान करते हुए एक दूसरे का मन हरण कर रहे हैं, और उस गान के साथ प्रशंसा परायण सखियाँ अपना मधुर तर स्वर मिला रही हैं। [5 & 6]

