जो नहिं जात बुलायेहु - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (93)

जो नहिं जात बुलायेहु - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (93)

जो नहिं जात बुलायेहु, शुक सनकादिक ध्यान।
बिनुहिँ बुलाये जात सोइ, घर घर ब्रज बनितान॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (93)

जो सगुण, सविशेष, साकार ब्रह्म—श्री कृष्ण—शुकदेव और सनकादिक परमहंसों की समाधि में अत्यधिक प्रयत्न करने पर भी नहीं पहुँचते, वही ब्रह्म श्री कृष्ण बिना बुलाए ही, ब्रजांगनाओं के घर-घर भागते हुए पहुँच जाते हैं। यह कितना बड़ा आश्चर्य है!