कीच लगी ब्रज खिरक की, इन गलियन की धूर।
अंग लगी जानी जबै, भाजि गए यम दूर॥
- ब्रज के दोहे
ब्रज की इन कुंज-गलियों की पावन रज जब अंगों पर लग जाती है, तो उसकी ऐसी महिमा है कि साक्षात् यमराज भी उसे देखकर, भयभीत होकर दूर भाग जाते हैं।
अंग लगी जानी जबै, भाजि गए यम दूर॥
- ब्रज के दोहे
ब्रज की इन कुंज-गलियों की पावन रज जब अंगों पर लग जाती है, तो उसकी ऐसी महिमा है कि साक्षात् यमराज भी उसे देखकर, भयभीत होकर दूर भाग जाते हैं।

