मन हरि में तन जगत में, कर्मयोग तेहि जान।
तन हरि में मन जगत में, यह महान अज्ञान॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (84)
जिसका मन सदा श्यामसुन्दर में अनुरक्त रहे और शरीर से संसार का कर्म संपन्न करे, वही सच्चा कर्मयोग है। किंतु जिसका मन संसार में अनुरक्त रहे और शरीर से भगवद्भक्ति करे, वह पराकाष्ठा का मूर्ख है।
तन हरि में मन जगत में, यह महान अज्ञान॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (84)
जिसका मन सदा श्यामसुन्दर में अनुरक्त रहे और शरीर से संसार का कर्म संपन्न करे, वही सच्चा कर्मयोग है। किंतु जिसका मन संसार में अनुरक्त रहे और शरीर से भगवद्भक्ति करे, वह पराकाष्ठा का मूर्ख है।

