रेफो हि कोटिजन्माघं - ब्रह्मवैवर्तपुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्डः (4.13.105)

रेफो हि कोटिजन्माघं - ब्रह्मवैवर्तपुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्डः (4.13.105)

रेफो हि कोटिजन्माघं कर्मभोगं शुभाशुभम् ।।
- ब्रह्मवैवर्तपुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्डः (4.13.105)

राधा में ‘र’ वर्ण के श्रवण-स्मरण एवं उच्चारण से करोड़ों जन्म के अर्जित शुभ अथवा अशुभ कर्म भोग मिट जाते हैं।